ज़िन्दगी एक जंग


ये ज़िन्दगी की जंग है साहब लड़नी तो पड़ेगी

जीतना हो जंग यदि,कठिनाइयां सहनी पड़ेगी।

ना होंगे अस्त्र शस्त्र, ना ही घोड़े हाथी

ये जंग है खुद की खुद से ,

इसमें साथ ना होगा कोई साथी।

कर्म और विवेक को बना लो अपने सिपाही,

आलस्य और निराशा से करनी होगी लड़ाई।

इस जंग के अदृश्य है दुश्मन,

जीत हेतु करना होगा काबू में मन।

विश्वास स्वयं पर रखना होगा ,

भटकावों से भी बचना होगा।

जीवन लक्ष्य मार्ग पर ,

स्वयं की सीमा से परे भी चलना होगा।

माना कि यह राह नहीं है आसान,

फूलों पर चलकर भला कौन योद्धा बना है महान।।

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